रेत नहीं, सिस्टम लुट रहा: अवैध खनन के खिलाफ दुर्गूकोंदल में आज से ‘महाआंदोलन’ का शंखनाद

भानुप्रतापपुर। विकासखंड दुर्गूकोंदल की खण्डी नदी में चैन माउंटेन मशीनों से सरेआम हो रहे अवैध रेत खनन ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। शासन-प्रशासन की कथित चुप्पी और निष्क्रियता से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। आज यानी मंगलवार, 21 अप्रैल से ‘दुर्गा मंच’ बाजार के पास अनिश्चितकालीन चरणबद्ध आंदोलन और धरना प्रदर्शन शुरू होने जा रहा है।
प्रशासन की ‘नींद’ उड़ाने की तैयारी: आंदोलन की रूपरेखा
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे अब केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेंगे। प्रशासन को जगाने के लिए अनोखे और कड़े प्रदर्शनों की सूची तैयार की गई है।
21 अप्रैल: अनिश्चितकालीन आंदोलन एवं धरना प्रदर्शन का आगाज।
24 अप्रैल: ‘नगाड़ा बजाओ प्रदर्शन’ – ताकि कुंभकर्णी नींद में सोए राजस्व और खनिज विभाग को जगाया जा सके।
27 अप्रैल: ‘सद्बुद्धि पूजा’ – अधिकारियों की मति सुधारने के लिए विशेष प्रार्थना।
30 अप्रैल: ‘अर्धनग्न प्रदर्शन’ – शासन की बेरुखी और तानाशाही के खिलाफ कड़ा विरोध।
”शिकायतें अनसुनी, अब सड़क पर होगा फैसला”
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे शोपसिंह आंचला, पूरन बघेल और नंद कुमार नेताम का कहना है कि खण्डी नदी का सीना मशीनों से छलनी किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लिखित शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह प्रतीत होता है कि “रेत नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम लुटा जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।”
”हमने तहसीलदार और थाना प्रभारी को सूचित कर दिया है। यदि आंदोलन के दौरान कोई अप्रिय स्थिति निर्मित होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।” — आंदोलनकारी समूह
अल्टीमेटम से हड़कंप
ग्रामीणों के इस कड़े रुख और चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस चेतावनी के बाद अवैध खनन माफियाओं पर नकेल कसता है, या ग्रामीणों का यह आक्रोश आने वाले दिनों में और उग्र रूप धारण करेगा।
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