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पखांजूर: करोड़ों की लागत से बन रहे कृषि महाविद्यालय में भ्रष्टाचार की ‘नींव’, नियमों को ताक पर रख चल रहा निर्माण

पखांजूर। क्षेत्र में बन रहे नए कृषि महाविद्यालय के भवन निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। करोड़ों की लागत से तैयार हो रहे इस सरकारी प्रोजेक्ट में निर्माण के बुनियादी मानकों (Quality Standards) की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताज्जुब की बात यह है कि साइट पर न तो कोई इंजीनियर मौजूद है और न ही सूचना पटल, जिससे यह पता चल सके कि काम की लागत और तकनीकी मापदंड क्या हैं।

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इंजीनियर रायपुर में, मुंशी के भरोसे करोड़ों का काम

स्थानीय ग्रामीणों और पत्रकारों द्वारा की गई पड़ताल में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि निर्माण स्थल पर कोई जिम्मेदार अधिकारी या इंजीनियर तैनात नहीं रहता। बताया जा रहा है कि संबंधित इंजीनियर रायपुर में बैठकर काम का संचालन कर रहे हैं, जबकि मौके पर पूरा जिम्मा एक मुंशी के हाथों में है।
जब जागरूक नागरिकों ने मुंशी से इंजीनियर का नंबर मांगा या नक्शा/एस्टीमेट (Estimate) दिखाने को कहा, तो उसने साफ इनकार कर दिया। मुंशी का कहना है कि जिसे भी जानकारी चाहिए, वह रायपुर जाकर इंजीनियर से मिले। यह व्यवहार निर्माण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

तकनीकी धांधली: मानकों से खिलवाड़

निर्माण कार्य में हो रही गड़बड़ियां सीधे तौर पर भवन की मजबूती को प्रभावित कर रही हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार:

सरिया का गलत इस्तेमाल: ड्राइंग और मानकों के अनुसार जहाँ 12 mm का सरिया (Steel Rods) लगना चाहिए, वहां लागत घटाने के लिए 10 mm का सरिया उपयोग किया जा रहा है।

प्लिंथ बीम में लापरवाही: भवन की मजबूती के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘प्लिंथ बीम’ (Plinth Beam) में क्रैक (Crank) नहीं डाला गया है, जो भविष्य में स्ट्रक्चर के धंसने का कारण बन सकता है।

बेस ढलाई में बड़ी हेरफेर: नियम के अनुसार फर्श में 40 mm गिट्टी से 10 सेमी बेस ढलाई के बाद ही 10 सेमी RCC ढलाई होनी चाहिए। लेकिन मुंशी द्वारा बेस को पूरी तरह गायब कर सीधे RCC ढलाई की जा रही है।

आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि बेस का पैसा बचाने के चक्कर में सीधे ढलाई कर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है।

सूचना पटल का अभाव और मनमानी
किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में ‘सूचना पटल’ (Information Board) लगाना अनिवार्य है, जिसमें प्रोजेक्ट का नाम, बजट, ठेकेदार का नाम और काम पूरा होने की अवधि लिखी होती है। पखांजूर कृषि महाविद्यालय की साइट पर ऐसा कोई बोर्ड नहीं है, जो प्रशासन की मिलीभगत या ठेकेदार की भारी लापरवाही को दर्शाता है।
जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर इस घटिया निर्माण को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि:
1. तत्काल निर्माण कार्य की तकनीकी जांच (Quality Audit) करवाई जाए।
2. दोषी ठेकेदार और अनुपस्थित इंजीनियर पर कड़ी कार्रवाई हो।
3. निर्माण स्थल पर एस्टीमेट और नक्शा सार्वजनिक किया जाए।
अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो करोड़ों का यह कृषि महाविद्यालय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा और कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है।

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