ग्राम पंचायत बैजनपुरी के ग्रामीणों और जनपद सीईओ के बीच तीखी नोकझोंक, सचिव को बचाने और दुर्व्यवहार का आरोप
पंचायत सचिव अश्वनी ध्रुव को हटाने की मांग को लेकर पहुंचे थे ग्रामीण, कार्यालय के भीतर 20 मिनट तक चला हंगामा

भानुप्रतापपुर । जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर में प्रशासनिक गतिरोध और जन आक्रोश का एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत बैजनपुरी में कार्यरत पंचायत सचिव श्रीमती अश्वनी ध्रुव के अभद्र व्यवहार, घोर लापरवाही और पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर जमी होने के विरोध में आज लगभग 50 की संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे थे। ग्रामीण मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सचिव के स्थानांतरण और कार्रवाई हेतु लिखित आवेदन सौंपने आए थे, लेकिन इस दौरान जनपद पंचायत सीईओ जी. एल. चुरेन्द्र के अड़ियल रवैये और कथित दुर्व्यवहार के कारण माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण हो गया।

ग्राम सरपंच सतीश कोरेटी, उपसरपंच द्वारिका प्रसाद यदु, ग्राम पटेल, दुर्गा प्रसाद केमरो, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष
माखन नेताम, तिलक सोरी , उत्तम सिन्हा, दानेश्वर बंजारे, किशोर ठाकुर, सुरेश चक्रधारी युवा संगठन अध्यक्ष, दीनानाथ दर्रो, मनोज भोयना , रामनाथ कोरेटिया ने बताया कि हम अपनी समस्याओं का आवेदन को लेकर जनपद सीईओ जीएल चुरेन्द्र के कक्ष में दाखिल हुए, तो अधिकारी ने ग्रामीणों की जायज शिकायतों को सुनने के बजाय उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया। ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद सीईओ द्वारा खुले तौर पर आरोपी सचिव अश्वनी ध्रुव के प्रति गहरी सहानुभूति दिखाई जा रही थी और उन्हें हर संभव तरीके से बचाने का प्रयास किया जा रहा था। इसके विपरीत, अपनी फरियाद लेकर दूर-दराज से आए ग्रामीणों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई। सीईओ के इस दमनकारी और पक्षपातपूर्ण रवैये को देखकर ग्रामीण आगबबूला हो गए और कार्यालय के भीतर ही दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। जनपद सीईओ और ग्रामीणों के बीच लगभग 20 मिनट तक जमकर नोकझोंक और विवाद चलता रहा, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया।
आवेदन में सचिव पर लगे हैं गंभीर आरोप
मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपे गए लिखित आवेदन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि सचिव अश्वनी ध्रुव पिछले 15 वर्षों से भी अधिक समय से बैजनपुरी में पदस्थ हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर उनका एकाधिकार स्थापित हो गया है। वह समय पर पंचायत भवन नहीं आती हैं, जिसके कारण ग्रामीणों के आवश्यक कार्य जैसे राशन कार्ड, विभिन्न प्रमाण पत्र, पेंशन, और मनरेगा आदि से संबंधित दस्तावेज महीनों तक लंबित रहते हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने सचिव पर गाली-गलौज, तानाशाही और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने का भी गंभीर आरोप लगाया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
जनपद सीईओ के व्यवहार से जनप्रतिनिधि और ग्रामीण दोनों त्रस्त
यह कोई पहली बार नहीं है जब जनपद सीईओ जी. एल. चुरेन्द्र के खिलाफ इस तरह की शिकायत सामने आई है। क्षेत्र में सीईओ द्वारा आम जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने के मामले आए दिन आते रहते हैं। पिछले दिनों जब कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम का भानुप्रतापपुर क्षेत्र में दौरा हुआ था, तब भी स्थानीय स्तर पर जनपद सीईओ के अड़ियल रवैये और कार्यप्रणाली की शिकायतें मंत्रियों तक पहुंचाई गई थीं। हालांकि, इतनी बड़ी शिकायतों और कैबिनेट मंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद भी अब तक उच्च अधिकारियों द्वारा सीईओ पर कोई दंडात्मक या सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासनिक तंत्र के हौसले बुलंद हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच और स्वयं कई सचिव भी जनपद सीईओ की कार्यप्रणाली से बुरी तरह त्रस्त हैं।
सूत्रों का दावा: निर्माण कार्यों में मोटी कमीशनखोरी का खेल
अंदरूनी सूत्रों और विभागीय गलियारों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत होने वाले विभिन्न विकास और निर्माण कार्यों की स्वीकृति तथा भुगतान के बदले में ग्राम पंचायत के सरपंचों, सचिवों और निर्माण ठेकेदारों से मोटी कमीशन (रिश्वत) की मांग की जाती है। इस भारी-भरकम कमीशनखोरी के दबाव के कारण ठेकेदार और सरपंच-सचिव धरातल पर सुचारू रूप से कार्य करने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। कमीशन न मिलने की स्थिति में फाइलों को अटकाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप समूचे क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह से प्रभावित और ठप पड़े हुए हैं। आज की घटना ने यह साफ कर दिया है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस प्रशासनिक अराजकता पर लगाम नहीं कसी, तो आने वाले दिनों में यह जनाक्रोश एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
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