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शहीद कृष्ण कुमार कोमरा को नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई, ‘अमर रहे’ के नारों से गूँजा भानुप्रतापपुर

भानुप्रतापपुरकांकेर-नारायणपुर सीमा पर नक्सलियों द्वारा डंप किए गए बारूद को निष्क्रिय करते समय वीरगति को प्राप्त हुए जिले के तीन लाडले सपूतों में से एक, शहीद कृष्ण कुमार कोमरा का पार्थिव देह आज उनके पैतृक गांव पहुँचा।

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अपने वीर नायक के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। भानुप्रतापपुर के मुख्य चौक से लेकर शहीद के गृह ग्राम लोहत्तर तक का माहौल गमगीन रहा और हर आँख नम नजर आई।


​शहीद कृष्ण कुमार कोमरा और संजय गड़पाले का पार्थिव शरीर जैसे ही नारायणपुर से भानुप्रतापपुर पहुँचा, समूचा क्षेत्र शोक की लहर में डूब गया। सुबह से ही मुख्य चौक पर सैकड़ों की संख्या में लोग अपने वीर सपूत की एक झलक पाने के लिए प्रतीक्षारत थे। जैसे ही शहीद का वाहन पहुँचा, जनता ने “शहीद कृष्ण कुमार अमर रहे” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों के साथ उनका स्वागत किया। स्थानीय लोगों ने पार्थिव देह पर पुष्प वर्षा कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई

शहीद कृष्ण कुमार कोमरा के गृह ग्राम लोहत्तर में पार्थिव शरीर पहुँचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस के आला अधिकारियों की उपस्थिति में शहीद को पूरे सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। जिस तिरंगे में लिपटकर जवान आया था, उसे पूरी गरिमा के साथ अधिकारियों ने परिजनों को सौंपा। इसके पश्चात, आदिवासी परंपरा के अनुसार शहीद को मुखाग्नि दी गई। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सगे-संबंधी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

शादी की चल रही थी तैयारी, घर का बड़ा चिराग बुझा

शहीद की माता देवकी बाई ने रुंधे गले से बताया कि कृष्ण कुमार उनका बड़ा बेटा था, जिसकी नौकरी 2011 में पुलिस विभाग में लगी थी। उन्होंने गर्व और दुख के मिश्रित भाव के साथ कहा मेरे दो बेटे और एक बेटी है। छोटा बेटा रूपेंद्र कोमरा इंडियन आर्मी में देश की सेवा कर रहा है और बड़ा बेटा पुलिस में रहकर शहीद हो गया। कृष्ण की शादी के लिए लड़की देख ली गई थी, अगले साल शादी की तैयारी थी। गस्त पर जाने वाले दिन ही उसने फोन किया था, पूछा था- माँ कैसी हो? घर में सब ठीक है न?”
​शहीद के पिता प्यारी लाल कोमरा और पूरे परिवार के लिए यह क्षति अपूरणीय है। उनकी इकलौती बहन, जो भिरागांव में ब्याही है, वह भी भाई के अंतिम दर्शन के लिए पहुँची थी।

मित्रों की यादों में ‘मिलनसार कृष्ण

ग्राम गायता पुरुषोत्तम देहारी ने अपने मित्र को याद करते हुए कहा कि कृष्ण कुमार बेहद मिलनसार व्यक्ति थे। गाँव में हर कोई उन्हें पसंद करता था। पूरी बस्ती उनकी शादी की खुशियों का इंतजार कर रही थी, लेकिन इस दुखद घटना ने सब कुछ बदल दिया। ​कांकेर जिले ने कृष्ण कुमार कोमरा, संजय गड़पाले और परमानन्द कोर्राम के रूप में अपने तीन जांबाज बेटों को खोया है, जिनका बलिदान सदैव याद रखा जाएगा।

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यशवंत चक्रधारी

मैं यशवंत चक्रधारी, भानुप्रतापपुर (कांकेर), छत्तीसगढ़ से हूँ और Kalam To Chalegi News का चीफ एडिटर हूँ। मेरा लक्ष्य ज़मीनी, सच्ची और निष्पक्ष खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

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