पंचायत अधिकारों के लिए आर-पार की जंग: भानुप्रतापपुर और दुर्गकोंदल के जनप्रतिनिधियों ने दी तालाबंदी की चेतावनी

भानुप्रतापपुर। क्षेत्र के विकास और पंचायत अधिकारों की रक्षा के लिए भानुप्रतापपुर एवं दुर्गकोंदल विकासखंड के सरपंचों और जनपद सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर मुखर हुए जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 11वें दिन से सभी ग्राम पंचायत और जनपद कार्यालयों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी कर दी जाएगी।
प्रमुख मांगें और मुद्दे
भानुप्रतापपुर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के माध्यम से कलेक्टर कांकेर को सौंपे गए ज्ञापन में जनप्रतिनिधियों ने निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया है:
DMF फंड पर अधिकार: माइंस प्रभावित ग्राम पंचायतों में सरपंचों और जनपद सदस्यों को कम से कम तीन-तीन निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी जाए।
ठेकेदारी प्रथा का विरोध: पंचायतों में बाहरी ठेकेदारों के हस्तक्षेप को पूरी तरह बंद करने की मांग की गई है।
CSR राशि का उपयोग: कंपनियों द्वारा दी जाने वाली सीएसआर राशि को सीधे ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में खर्च किया जाए।
वित्तीय स्वायत्तता: गौण खनिज से प्राप्त होने वाली राशि पंचायतों को उपलब्ध कराई जाए ताकि ग्रामीण विकास को गति मिल सके।
प्रशासनिक प्रक्रिया: जनपद पंचायत की सामान्य सभा से अनुमोदन मिलने के बाद ही किसी भी कार्य का प्राक्कलन (Estimate) तैयार किया जाए।
नेतृत्व और एकजुटता
यह प्रदर्शन जनपद अध्यक्ष भानुप्रतापपुर सुनाराम तेता, जनपद अध्यक्ष दुर्गकोंदल गोपी बढ़ाई, जनपद उपाध्यक्ष आनंद तेता और निर्मला कावड़े के नेतृत्व में किया गया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायतों को उनके संवैधानिक अधिकार और संसाधन मिलने से ही गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होंगे।
प्रदर्शन में शामिल मुख्य चेहरे
ज्ञापन सौंपने के दौरान भारी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से: जनपद सदस्य: वरुण खपड़े, विष्णु कचलाम, प्रेमबती उसेंडी, हेमलता उइके, सुलोचना कोरोटी, और अन्य। सरपंच संघ: प्रदीप कोरेटी (अध्यक्ष सरपंच संघ भानुप्रतापपुर), सियाराम उयके, ममता ठाकुर (भानबेड़ा), गंगा सलाम (फरसकोट), डालन सिंह राना (पेंवारी) सहित बड़ी संख्या में सरपंच शामिल थे।
”प्रशासन पंचायतों के अधिकारों की अनदेखी कर रहा है। यदि 10 दिनों में हमारी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो हमें लोकतांत्रिक तरीके से तालाबंदी जैसा कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
— संयुक्त संघ, भानुप्रतापपुर-दुर्गकोंदल
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