ठगों और दलालों के जाल में फंसा एनहुर का एक और किसान: 18 लाख में बिकी पुश्तैनी जमीन, ट्रैक्टर भी जब्त, हाथ बचे सिर्फ 15 हजार
यशवंत चक्रधारी

कांकेर । बैंकों के चक्कर काटते सीधे-साधे किसानों को अपनी मीठी बातों में फंसाकर लूटने वाले गिरोह का एक और खौफनाक कारनामा सामने आया है। दुर्गूकोंदल ब्लॉक के ग्राम एनहुर निवासी किसान लच्छू राम यादव के साथ हुई धोखाधड़ी की कहानी यह बताने के लिए काफी है कि जिले में जमीन दलालों और ठगों का सिंडिकेट कितना बेखौफ होकर काम कर रहा है। कम ब्याज पर लोन दिलाने के नाम पर शुरू हुआ यह खेल किसान की पुश्तैनी जमीन छीनने और उसे पूरी तरह कंगाल करने पर जाकर खत्म हुआ।

लोन दिलाने के बहाने मिली ठगों की कड़ी
किसान लच्छू राम यादव अपने ट्रैक्टर की रुकी हुई किश्तें चुकाने के लिए बैंक से लोन लेने के सिलसिले में लगातार चक्कर काट रहे थे। इसी दौरान बैंक के बाहर उनकी मुलाकात हर्ष यादव नाम के व्यक्ति से हुई। हर्ष यादव ने कम ब्याज दर पर पैसा दिलवाने का झांसा दिया और किसान का विश्वास जीतकर उनकी जमीन का पट्टा, आधार कार्ड और पैन कार्ड अपने पास जमा करा लिया। जब कई दिनों तक पैसे नहीं मिले और किसान ने संपर्क किया, तो पता चला कि उनका पूरा दस्तावेज कांकेर के जमीन दलालों तक पहुंच चुका था।

हाफ रजिस्ट्री के नाम पर छलावा, करा ली फुल रजिस्ट्री
कांकेर के जमीन दलाल हेमलाल बघेल ने किसान को जमीन गिरवी रखकर 18 लाख रुपये दिलाने की बात कही। इसके बाद किसान को ‘हाफ रजिस्ट्री’ (बंधक/अल्पकालिक दस्तावेज) कराने का झांसा देकर तहसील ले जाया गया, लेकिन झांसे में रखकर पूरी जमीन की ‘फूल रजिस्ट्री’ करा ली गई। रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसान को 18 लाख रुपये (कुछ नकद और कुछ बैंक खाते के जरिए) सौंप दिए गए। लेकिन असली साजिश का खेल उसी दिन से शुरू हुआ।
18 लाख रुपये की ऐसे हुई सुनियोजित ‘लूट’:
रजिस्ट्री व कमीशन का खेल: हाफ रजिस्ट्री का झांसा देने की एवज में किसान से तत्काल 1.25 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। इसके तुरंत बाद दलालों ने अपना ‘कमीशन’ बताकर 2 लाख रुपये और वसूल लिए।
पैसा डबल करने का हर्बल स्केम: इसके बाद दलाल हेमलाल बघेल ने किसान को भानुप्रतापपुर तक छोड़ा और झांसा दिया कि एक हर्बल कंपनी में 8 लाख रुपये लगाने पर पैसा डबल हो जाएगा, जिससे वे अपना ट्रैक्टर का कर्ज आसानी से चुका सकेंगे। किसान से 8 लाख रुपये और ऐंठ लिए गए।
चेक के जरिए खाता साफ: किसान के बैंक खाते में जो बची हुई राशि आई थी, दलालों ने पहले से लिए गए ब्लैंक चेक का इस्तेमाल कर 6.50 लाख रुपये खाते से निकाल लिए।
अंतिम वार: इसके बाद टेमन साहू नामक व्यक्ति ने किसी अन्य काम का बहाना बनाकर 10 हजार रुपये और ले लिए।
18 लाख रुपये में बेची गई जमीन के बदले किसान के हाथ में अंततः महज 15 हजार रुपये बचे।
जमीन भी गई, पैसा भी गया और ट्रैक्टर भी खींच ले गया शोरूम
किसान लच्छू राम यादव ने जिस ट्रैक्टर की किश्त पटाने के लिए इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत की थी, किश्त न पट पाने के कारण शोरूम वाले उस ट्रैक्टर को भी उठाकर ले गए। आज किसान के पास न उसकी जमीन बची है, न पैसे और न ही ट्रैक्टर।
यह घटना दर्शाती है कि जिले में बैंक परिसरों के आसपास दलालों का समानांतर नेटवर्क सक्रिय है, जो जरूरतमंद और भोले-भाले ग्रामीणों को चिन्हित कर शिकार बना रहा है।
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