ताश खेलते रंगे हाथों पकड़े गए भानुप्रतापपुर काष्ठागार रेंजर मनीष जैन, 10 दिन बाद भी वन विभाग की कार्रवाई शून्य

भानुप्रतापपुर | वन विभाग के भानुप्रतापपुर काष्ठागार में पदस्थ रेंजर मनीष जैन के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद विभागीय स्तर पर मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। गत 3 अगस्त को ग्राम रानिडोंगरी में पुलिस की छापेमारी के दौरान रेंजर मनीष जैन को ताश पत्ती (जुआ) खेलते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। इस घटना के 10 दिन बीत जाने के बाद भी वन विभाग द्वारा उनके खिलाफ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
लिखित शिकायत के बाद भी आला अफसर मौन
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं मुख्य वन संरक्षक (CCF) को साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत सौंपी जा चुकी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए जाने के बावजूद अब तक न तो रेंजर को निलंबित किया गया है और ना ही कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
सिविल सेवा आचरण नियमों की अनदेखी
नियमों के अनुसार, किसी शासकीय सेवक के इस तरह के गैर-कानूनी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने या पुलिसिया कार्रवाई के दायरे में आने पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। परंतु 10 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर चुप्पी साध लेना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय:
इस पूरे मामले में वन विभाग की ढिलाई को लेकर आम जनता और विभाग के कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या रेंजर मनीष जैन को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते उन पर कार्रवाई करने से बचा जा रहा है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि उच्च अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेकर कब तक कड़ा रुख अपनाते हैं, या फिर मामला यूं ही फाइलों में दबा रह जाएगा।
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