कोंडागांव में सर्व पिछड़ा वर्ग समाज का विशाल महाप्रदर्शन: 27% आरक्षण और अलग जनगणना कॉलम समेत 3 प्रमुख मांगों को लेकर भारी हुंकार

कोंडागांव: छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के तत्वावधान में आरक्षण और समाज के विभिन्न संवैधानिक अधिकारों को लेकर कोंडागांव जिला मुख्यालय में एक ऐतिहासिक व विशाल महाप्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन में बस्तर संभाग के सभी जिलों के साथ-साथ सक्ती, रायपुर और अंबिकापुर से आए समाज के लगभग 1 लाख से अधिक लोगों ने एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाई।

समाज के नेताओं ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग के अधिकारों की यह लड़ाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी। पूर्व में 19 अगस्त को कांकेर जिले में सफल प्रदर्शन के बाद अब कोंडागांव में यह विशाल आंदोलन आयोजित किया गया। आंदोलन की कड़ी में अगला पड़ाव 21 अक्टूबर को सुकमा जिला मुख्यालय रहेगा। इसके साथ ही, आगामी 18 अक्टूबर को बस्तर संभाग की सभी विधानसभाओं के विधायकों एवं सांसदों को समाज द्वारा अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा।
सर्व पिछड़ा वर्ग समाज की 3 प्रमुख मांगें:
27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए।
राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी (OBC) का अलग से कॉलम दर्ज किया जाए।
पिछड़ा वर्ग समाज को पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अधिकार व सुरक्षा प्रदान की जाए।

आंदोलन के दौरान प्रमुख वक्ताओं के विचार:
हरेश चक्रधारी (ओबीसी नेता): सभा को संबोधित करते हुए हरेश चक्रधारी ने कहा, “अगर इस आंदोलन के लिए हमें जरूरत पड़ी तो हम विधानसभा से लेकर लोकसभा तक की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। आज समाज को अपनी शक्ति दिखानी होगी, अगर आज हम चूक गए तो फिर कभी ऐसा मौका नहीं मिलेगा।” उन्होंने त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि पहले ओबीसी के लिए वार्ड पंच और पार्षद के पद आरक्षित रहते थे, जिसे भाजपा सरकार ने आते ही पूरी तरह खत्म कर दिया है। इससे भविष्य में हमारे बच्चों के अवसरों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
मनीष टेम्पा योगी (संभागीय संगठन महामंत्री): मनीष टेम्पा योगी ने विशाल संख्या में पहुंचे समाज के लोगों का आभार व्यक्त किया। सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अंधी-बहरी बनी हुई है और पिछड़ा वर्ग की न्यायसंगत मांगों को अनसुना कर रही है। यदि सरकार ने मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो समाज इस सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने में पीछे नहीं हटेगा।
फूलचंद दीवान (सामाजिक नेता): फूलचंद दीवान ने बस्तर के संसाधनों के दोहन पर सवाल उठाते हुए कहा, “बस्तर से कच्चा लोहा देश-विदेश और बड़े शहरों में जा रहा है, जिससे रायपुर और बिलासपुर जैसे शहर चकाचक हो रहे हैं, लेकिन बस्तर के मूल निवासियों को आज भी अच्छी सड़कें नसीब नहीं हो रही हैं।” उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 200 साल चली लड़ाई का उदाहरण देते हुए समाज से निराश न होने की अपील की और कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष जारी रहेगा।
टिकेश्वरी सिन्हा एवं शिल्पा देवांगन (महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष): आंदोलन में महिलाओं की विशाल भागीदारी की सराहना करते हुए टिकेश्वरी सिन्हा ने कहा कि आज नारी शक्ति इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और समाज की जीत अब दूर नहीं है। वहीं, महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष शिल्पा देवांगन ने उपस्थित माताओं-बहनों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आरक्षण की यह लड़ाई लंबी है और इसमें महिलाओं की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी पुरुषों की।

कांकेर और कोंडागांव के अभूतपूर्व प्रदर्शन के बावजूद शासन-प्रशासन की उपेक्षा से पिछड़ा वर्ग समाज में गहरा असंतोष व्याप्त है। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाया जाएगा।
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