टीना शेड के फेर में फंसा कांकेर जिला पंचायत: न मांग, न गुणवत्ता, फिर भी 20 लाख के शेड में झोंक दिया DMF का 60% बजट!
यशवंत चक्रधारी

कांकेर। गांव में बच्चों को पढ़ने के लिए न तो ठीक-ठाक स्कूल की छत नसीब हो रही है, न बहते नाले पर पुलिया और न ही चलने के लिए सीसी रोड। लेकिन साहब बहादुरों को गांव-गांव में बस एक ही चीज की बेहद सख्त ‘जरूरत’ महसूस हो रही है—वो है चमचमाता ‘टीना शेड’! चौंकिए मत, यह कांकेर जिले के विकास का नया मॉडल है, जहां ग्रामीणों की सालों पुरानी बुनियादी मांगों को रद्दी की टोकरी में डालकर करोड़ों रुपये के टीना शेड ताने जा रहे हैं। मामला अब तूल पकड़ चुका है और आम आदमी पार्टी (AAP) ने सीधे तौर पर अफसरशाही और राजनेताओं की सांठगांठ का भांडाफोड़ करते हुए जांच की हुंकार भर दी है।

”साहब, हमने तो कभी टीना शेड मांगा ही नहीं!”
ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। गांव के लोगों का साफ कहना है कि उन्होंने आज तक जिला पंचायत से टीना शेड की मांग ही नहीं की। सालों से ग्रामीण आंगनबाड़ी, स्कूल भवन, पुल-पुलिया और सड़कों के लिए आवेदन देकर थक चुके हैं, लेकिन उन फाइलों पर अफसरों की कलम नहीं चलती। अचानक रातों-रात गांव में 20-20 लाख रुपये के टीना शेड मंजूर हो जाते हैं और काम भी शुरू हो जाता है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है—जब जरूरत सड़क और स्कूल की है, तो जबरन टीना शेड किसके इशारे पर थपे जा रहे हैं?

DMF के 60% बजट का एक ही मंत्र: बस टीना शेड बनाओ!
जिला खनिज न्यास संस्थान (DMF) की राशि का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवनस्तर को सुधारना और बुनियादी सुविधाएं देना था। लेकिन कांकेर जिला पंचायत में DMF का करीब 60 फीसदी बजट सिर्फ टीना शेड के निर्माण में स्वाहा किया जा रहा है। सूत्रों और स्थानीय दावों की मानें तो 20 लाख की लागत से बनने वाले इन शेडों की गुणवत्ता इतनी रद्दी है कि पहली ही आंधी में इनके परखच्चे उड़ जाएं।
हैरानी की बात तो यह है कि घटिया निर्माण को देखकर भी जिम्मेदार इंजीनियरों की जुबान पर ताले जड़े हुए हैं। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इंजीनियरों की यह चुप्पी मजबूरी है या फिर ‘मलाई’ में उनकी भी बराबर की हिस्सेदारी है?

’टेबल रोटेशन’ का ड्रामा और मलाई का खेल
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जिला पंचायत प्रशासन ने हाल ही में ‘टेबल रोटेशन’ का पैचवर्क किया है। लेकिन AAP नेताओं का कहना है कि सिर्फ कुर्सियां बदलने से जिला पंचायत में फैला भ्रष्टाचार खत्म नहीं होने वाला। अंदरखाने चर्चा गरम है कि टीना शेड निर्माण के नाम पर अफसर और चुनिंदा नेता मिलकर जमकर ‘मलाई’ काट रहे हैं।

AAP की सीधी मांग: पूर्व कलेक्टर और वर्तमान CEO के व्हाट्सएप चैट की हो जांच
मामले में तड़का लगाते हुए आम आदमी पार्टी ने बड़ा बयान दिया है। AAP नेता नरेंद्र नाग ने मांग की है कि पूर्व में रहे कलेक्टर और वर्तमान जिला पंचायत CEO के व्हाट्सएप चैट और कॉलिंग डिटेल्स की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि कॉल डिटेल्स खंगालने पर सब शीशे की तरह साफ हो जाएगा कि किन-किन रसूखदार नेताओं की सिफारिश और सेटिंग पर ये टीना शेड बांटे गए हैं और भ्रष्टाचार का यह खेल कहां तक फैला है।
अब देखना यह होगा कि इस तीखे खुलासे के बाद जिला प्रशासन की नींद खुलती है या फिर टीना शेड की आड़ में ‘मलाई’ बांटने का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है!
Live Cricket Info








