सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ ग्राम सभा द्वारा पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले होर्डिंग्स को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें एक ग्राम सभा द्वारा गांव के प्रवेश द्वारों पर पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले होर्डिंग्स लगाने की कार्रवाई को सही ठहराया गया था।
मुख्य बिंदु:
मामला: ग्राम सभा ने गांव में जबरन या प्रलोभन के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से नोटिस बोर्ड लगाए थे।
पीठ: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।
कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को नियमों के तहत उचित प्राधिकारी (ग्राम सभा) के पास जाना चाहिए था, जो सबूतों और तथ्यों के आधार पर मामले की जांच कर सकते थे।
बहस के दौरान क्या हुआ?
वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने तर्क दिया कि ईसाइयों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना असंवैधानिक है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 10 वर्षों में छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के एक भी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई है। उन्होंने प्रार्थना सभाओं पर हमलों और धर्मांतरित आदिवासियों को दफनाने की अनुमति न देने जैसे अन्य लंबित मामलों का भी हवाला दिया।
दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के सामने सीमित दलीलें रखी थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कई नए तथ्य जोड़ दिए गए हैं, इसलिए उन्हें फिर से हाई कोर्ट या संबंधित अधिकारियों के पास जाना चाहिए।
हाई कोर्ट का पिछला फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने फैसले में याचिकाकर्ता को संबंधित सक्षम प्राधिकारी के पास जाने की छूट दी थी। कोर्ट ने माना था कि ग्राम सभा का यह कदम गांव की सांस्कृतिक और धार्मिक अखंडता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए था।
Live Cricket Info





