भानुप्रतापपुर: जल संसाधन विभाग के SDO पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग

भानुप्रतापपुर | छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर में जल संसाधन विभाग एक बड़े विवाद के घेरे में आ गया है। विभाग के अनुविभागीय अधिकारी (SDO) पर वित्तीय अनियमितताओं, मनरेगा नियमों के उल्लंघन और कार्य में घोर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में प्रमुख अभियंता (नवा रायपुर) को पत्र लिखकर अधिकारी की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

भ्रष्टाचार और मनमानी के पांच प्रमुख आरोप
शिकायतकर्ता ने पांच बिंदुओं के आधार पर शिकायत की है
• मनरेगा नियमों की धज्जियां: आरोप है कि जनकपुर लाताबां जलाशयों के नहर निर्माण के करोड़ों के कार्यों को जानबूझकर छोटे टुकड़ों में बांटकर पसंदीदा फर्मों को फायदा पहुंचाया गया। गुणवत्ता खराब होने के कारण उच्चाधिकारियों द्वारा काम निरस्त किए जाने के बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर मजदूरों को नकद (Cash) भुगतान किया गया।
• मशीनों का अवैध उपयोग: मनरेगा कार्यों में मानव श्रम के बजाय जेसीबी और ट्रैक्टर जैसी मशीनों का अवैध उपयोग किया गया। साथ ही, ग्रामीणों का 6-7 महीनों से भुगतान रोककर रखा गया है।
• पुरानी जांचें ठंडे बस्ते में: रारवाही तालाब नहर निर्माण और ‘विशेष केंद्रीय सहायता मद’ के कार्यों में भी धांधली की शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
• विकास कार्यों पर ब्रेक: पिछले 7-8 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे होने के कारण विकास की गति धीमी पड़ने का आरोप है। मदले रेगाटोला और दुर्गूकोंदल जैसे क्षेत्रों में एनीकट के कार्य बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
• मुख्यालय से दूरी: अधिकारी पर अपने निर्धारित मुख्यालय से अक्सर नदारद रहने और अपना समय रायपुर या जगदलपुर में बिताने का आरोप है, जिससे किसान और आम जनता परेशान है।
पारदर्शी जांच की मांग
राजेश रंगारी ने अपने पत्र में स्पष्ट मांग की है कि एक उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की जाए जो शिकायतकर्ता की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से मामले की जांच करे। उन्होंने दोषी पाए जाने पर अधिकारी के तत्काल स्थानांतरण और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
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