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भानुप्रतापपुर अस्पताल में ‘मुफ्त’ एम्बुलेंस के नाम पर वसूली: बीएमओ बोले— ‘डीजल, चाय-नाश्ते के लिए पैसे लेते हैं ड्राइवर’

भानुप्रतापपुर। सरकार एक ओर स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को निःशुल्क परिवहन सुविधा देने का दावा करती है, वहीं भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जमीनी हकीकत इसके उलट है। यहाँ सरकारी एम्बुलेंस के चालक मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुलेआम अवैध वसूली कर रहे हैं, और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर लगाम लगाने के बजाय इसे जायज ठहरा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

​जानकारी के मुताबिक, ग्राम चिचगांव निवासी मंगल चक्रधारी अपनी गर्भवती पत्नी रीना चक्रधारी को प्रसव के लिए रविवार को भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए थे। अस्पताल पहुंचने पर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें उच्च केंद्र रेफर कर दिया। मरीज को दल्ली राजहरा स्थित निजी अस्पताल ले जाने के लिए सरकारी वाहन (क्र. CG 02 7386) का उपयोग किया गया।
​मरीज के परिजनों का आरोप है कि इस यात्रा के बदले वाहन चालक राजेन्द्र बघेल द्वारा उनसे 1200 रुपये की मांग की गई और राशि वसूल की गई। बता दें कि भानुप्रतापपुर से दल्ली राजहरा की दूरी मात्र 30 किलोमीटर है, जिसके लिए सरकारी वाहन में निःशुल्क सुविधा होनी चाहिए थी।

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जिम्मेदार अधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना जवाब

​जब इस गंभीर मामले की शिकायत खंड चिकित्सा अधिकारी सचिंद्र गोटा से की गई, तो उनका जवाब तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला था। बीएमओ ने कथित तौर पर कहा कि “पेट्रोल के लिए पैसा लिया जाता है और ड्राइवर कभी-कभी चाय-नाश्ते के लिए भी मांग लेते हैं।” जब विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारी ही भ्रष्टाचार और अवैध वसूली को ‘चाय-नाश्ते’ का नाम देकर संरक्षण देंगे, तो निचले स्तर के कर्मचारियों का मनोबल बढ़ना स्वाभाविक है। इससे स्पष्ट होता है कि यह वसूली प्रबंधन की जानकारी में ही चल रही है।

अव्यवस्थाओं का केंद्र बना भानुप्रतापपुर अस्पताल

​यह कोई पहला मामला नहीं है। भानुप्रतापपुर सरकारी अस्पताल आए दिन विवादों के घेरे में रहता है। स्थानीय ग्रामीणों और मरीजों ने कई बार शिकायत की है कि
​ड्यूटी के समय डॉक्टर अक्सर अस्पताल से नदारद रहते हैं।
​मरीजों और उनके परिजनों के साथ स्टाफ द्वारा दुर्व्यवहार किया जाता है। ​निःशुल्क मिलने वाली सेवाओं के बदले पर्दे के पीछे से पैसे वसूले जाते हैं।

जनता में आक्रोश

​सरकार द्वारा संचालित ‘महतारी एक्सप्रेस’ और अन्य एम्बुलेंस सेवाएं इसलिए शुरू की गई थीं ताकि गरीब मरीजों को समय पर और बिना किसी खर्च के इलाज मिल सके। लेकिन भानुप्रतापपुर में यह योजना ड्राइवरों की कमाई का जरिया बन गई है। क्षेत्र की जनता अब प्रशासन से यह सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक मरीजों की बेबसी का यह सौदा होता रहेगा?

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यशवंत चक्रधारी

मैं यशवंत चक्रधारी, भानुप्रतापपुर (कांकेर), छत्तीसगढ़ से हूँ और Kalam To Chalegi News का चीफ एडिटर हूँ। मेरा लक्ष्य ज़मीनी, सच्ची और निष्पक्ष खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

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