राष्ट्रीय मानचित्र पर उभरता मनेन्द्रगढ़ का मरीन फॉसिल पार्क: डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय की टीम ने किया अध्ययन भ्रमण

रायपुर (मनेन्द्रगढ़) | छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क आज वैज्ञानिक पर्यटन और शोध के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के मार्गदर्शन और वन विभाग के उत्कृष्ट संरक्षण प्रयासों के बीच, बीते रविवार (1 फरवरी, 2026) को मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय (सागर) के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग की एक उच्च स्तरीय शैक्षणिक टीम ने यहाँ का अध्ययन भ्रमण किया।
संरक्षण के साथ वैज्ञानिक विकास पर जोर
सालों की गुमनामी से ‘एशिया के सबसे बड़े पार्क’ तक का सफर
1954 में भू-वैज्ञानिक एस.के. घोष ने कोयला खदानों के बीच जिन पत्थरों को पहचाना था, वे आज दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। DFO मनीष कश्यप की काल्पनिक सोच ने इसे एक ‘लिविंग म्यूजियम’ में तब्दील कर दिया है।
मनीष कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग ने इस दुर्लभ भूगर्भीय धरोहर को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पार्क में वर्तमान में निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं:

• सुरक्षित सीमांकन: जीवाश्मों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी।
• सूचना प्रबंधन: पर्यटकों और छात्रों के लिए विस्तृत प्रदर्शक बोर्ड।
• नियंत्रित पर्यटन: पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए सुव्यवस्थित भ्रमण व्यवस्था।

शैक्षणिक पर्यटन का नया मॉडल
भ्रमण के दौरान जिले के पुरातत्व एवं पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय ने विश्वविद्यालय की टीम को शासन की भावी योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इस स्थल को वैज्ञानिक अध्ययन और जनजागरूकता के एक समन्वित मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मनेन्द्रगढ़ का यह पार्क देश की अत्यंत महत्वपूर्ण भूगर्भीय धरोहर है। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय जैसे संस्थान का यहाँ आना हमारे संरक्षण प्रयासों की सार्थकता को प्रमाणित करता है। अप्रैल 2025 में इसके औपचारिक उद्घाटन के बाद से अब तक 18,000 से अधिक पर्यटक यहाँ आ चुके हैं, जिनमें मध्य प्रदेश से आने वाले सैलानियों की संख्या काफी अधिक है।”
— मनीष कश्यप, DFO, मनेन्द्रगढ़
भविष्य की राह
वन विभाग की इस पहल को अब राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक मान्यता मिल रही है। विभाग का लक्ष्य इस अमूल्य प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखते हुए इसे शोध का एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाना है। प्रतिष्ठित संस्थानों का बार-बार यहाँ आना यह सिद्ध करता है कि छत्तीसगढ़ का यह मरीन पार्क अब राष्ट्रीय शैक्षणिक मानचित्र पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा चुका है।
Live Cricket Info





