धान खरीदी में 2 दिन की वृद्धि ‘ऊंट के मुँह में जीरा’, भाजपा सरकार किसानों को कर रही गुमराह: नमन झाबक जैन

भानुप्रतापपुर। कांकेर लोकसभा आईटी सेल सोशल मीडिया अध्यक्ष नमन झाबक जैन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रदेश की साय सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने धान खरीदी की समय सीमा में मात्र दो दिन की वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुए इसे किसानों के साथ छलावा करार दिया है। जैन का कहना है कि यह निर्णय ‘ऊंट के मुँह में जीरा’ के समान है और सरकार की मंशा किसानों का पूरा धान खरीदने की नहीं है।
आंकड़ों ने खोली पोल: पिछले वर्ष की तुलना में कम हुई खरीदी
नमन झाबक जैन ने विभिन्न समितियों के तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि धान खरीदी की प्रक्रिया शुरुआत से ही अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई थी। उन्होंने बताया कि भानुप्रतापपुर क्षेत्र की प्रमुख समितियों में पिछले वर्ष (2024-25) की तुलना में इस वर्ष (2025-26) खरीदी में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
समिति वार खरीदी का तुलनात्मक विवरण (क्विंटल में):

नमन जैन ने बताया कि गत वर्ष कुल खरीदी 4,41,091 क्विंटल हुई थी, जो इस बार घटकर मात्र 4,00,214 क्विंटल रह गई है। यानी पिछले वर्ष के मुकाबले अब तक 10,877 क्विंटल कम धान खरीदा गया है।
दो दिन में खरीदी संभव नहीं, 10 दिन बढ़ाने की मांग
प्रेस विज्ञप्ति में सवाल उठाया गया है कि जब धान खरीदी शुरू से ही देरी से चल रही थी और अंतिम समय में किसान असुविधाओं से जूझते रहे, तो मात्र दो दिन बढ़ाना किस आधार पर न्यायसंगत है? वर्तमान में केवल सत्यापित किसानों का ही धान लिया जा रहा है, ऐसे में शेष बचे हुए किसान अपना धान कहाँ बेचेंगे?
”अगर साय सरकार वास्तव में किसान हितैषी है और उनका पूरा धान खरीदना चाहती है, तो समय सीमा को कम से कम 10 दिन बढ़ाया जाना चाहिए। दो दिन का समय केवल औपचारिकता है, जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला।”
Live Cricket Info





