भानुप्रतापपुर: सरकारी अस्पताल की एंबुलेंस सेवा में अवैध वसूली, मुफ्त सेवा के नाम पर परिजनों से ऐंठे जा रहे पैसे

भानुप्रतापपुर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर शासकीय अस्पताल से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली नि:शुल्क एंबुलेंस सेवा के नाम पर मरीजों के परिजनों से अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं। ताजा मामले में डिलीवरी के बाद गंभीर हालत में बच्चों को रेफर करने के नाम पर ड्राइवर द्वारा रुपयों की मांग की गई।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांति नेताम (ग्राम पुत्तरवाही) और अमिता बोगा (ग्राम रसोली) प्रसव के लिए भानुप्रतापपुर के शासकीय अस्पताल में भर्ती हुई थीं। बच्चों के जन्म के बाद उनकी स्थिति कमजोर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी।
रेफर किए जाने पर अस्पताल की ही शासकीय एंबुलेंस का उपयोग किया गया। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस ड्राइवर ने मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनसे 700 रुपये का डीजल डलवाया और साथ ही 700 रुपये नगद की मांग की। नवजात बच्चों की जान बचाने की फिक्र में परिजनों ने जैसे-तैसे पैसे जुटाकर ड्राइवर को दिए।
लगातार सामने आ रही हैं शिकायतें
यह कोई पहला मामला नहीं है जब भानुप्रतापपुर अस्पताल में इस तरह की धांधली देखी गई हो। इससे पहले भी ग्राम चिचगांव की एक महिला से एंबुलेंस सेवा के बदले डीजल और ‘चाय-नाश्ते’ के नाम पर पैसे लेने की शिकायत सामने आ चुकी है।
परिजनों का दर्द: “जब सरकार ने महतारी एक्सप्रेस और 108 जैसी सेवाएं मुफ्त दी हैं, तो फिर हमसे डीजल और नगद पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं? गरीब मरीज आखिर कहाँ जाए?”
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
सरकारी नियमों के मुताबिक, प्रसूता महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए रेफरल सेवा पूरी तरह नि:शुल्क होती है। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में सक्रिय एंबुलेंस चालकों की यह मनमानी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या अस्पताल प्रबंधन को इस वसूली की जानकारी नहीं है, या जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंदी जा रही हैं?
अब देखना होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग और उच्च अधिकारी संबंधित ड्राइवर और लापरवाह प्रबंधन पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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