अतिक्रमण की कार्रवाई में पक्षपात का आरोप: गोंडवाना समाज ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

भानुप्रतापपुर। ग्राम बोगर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को गोंडवाना समाज समन्वय समिति ग्राम-बोगर और गोंडवाना समाज भानुप्रतापपुर के प्रतिनिधियों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार सुरेंद्र उर्वसा को एक ज्ञापन सौंपा। समाज का आरोप है कि प्रशासन द्वारा केवल एक व्यक्ति को दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि गांव में कई अन्य रसूखदार लोगों ने भी सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है।

क्या है पूरा मामला?
सौपे गए ज्ञापन के अनुसार, हाल ही में समाचार पत्रों में वनकर्मी कांशीराम दर्रों पर सरकारी तालाब और वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोप लगे थे। गोंडवाना समाज का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह निराधार हैं और पुरानी रंजिश के चलते उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। समाज के अनुसार, जिस भूमि को अतिक्रमण बताया जा रहा है, वह वर्ष 2002 से उनके परिवार के कब्जे में है और पूर्व की जांच में उसे वैध पाया गया था।

सूची सौंपकर ‘समान कार्रवाई’ की मांग
गोंडवाना समाज ने तहसीलदार को गांव के अन्य 16 स्थानों की सूची भी सौंपी है, जहां कथित तौर पर अवैध कब्जे किए गए हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि:
1. समुदायिक शौचालय स्थल, जो वनभूमि के अन्दर है, गजेन्द्र निषाद द्वारा घर बनाया गया है।
2. सीता निषाद पति गजेन्द्र निषाद गोदाम के समीप ईंटा रखकर कब्जा किए है।
3. उमेन्द्र खड़हे पिता धरम खड़हे जो कि 308/1 की शासकीय भूमि पर मकान बना रहे है।
4. कमल उसेण्डी पिता मनीराम उसेण्डी कचरा हेतु लगे पोल को भी उखाड़कर मकान बनाया है।
5. गौठान, स्वास्थ्य केन्द्र, खाद्यान गोदाम के पास मनोज ध्रुव, नरेन्द्र उसारे, कब्जा किए है। जबकि मनोज ध्रुव भी एक शासकीय कर्मचारी है, तो दोहरा भेदभाव क्यों।
6. रमेश सलाम पिता छेरकुराम अपने नीति भूमि से अधिक स्थल जो खेल मैदान एवं आंगनबाड़ी के रास्ता को भी मिट्टी (मेढ़) बनाकर कब्जा किए है।
7. मरघट स्थल पर कोटवार द्वारा कब्जा किया गया है।
8. वनभूमि के अन्दर कोटवार द्वारा तालाब बनाया गया है।
9. वनभूमि के जमीन में रोशन दरों द्वारा मुरूम खनन किया गया है।
10. ज्ञानसिंह गौर स्वयं दूसरे का जमीन को हड़प कर कब्जा किए हैं।
11. ग्राम रानीतराई के पास तालाब मेढ़ में माखन खड़हे द्वारा कब्जा कर शौचालय निर्माण किया गया है।
12. गनपत यादव द्वारा वनभूमि लगभग 3 एकड़ में सफाई कर कब्जा किया गया है।
13. गोंडवाना भवन बोगर में बोर खनन किया जाना था जो कि अभी तक नहीं किया गया है।
14. गोटूल भवन के लिए 300 मीटर सी.सी. रोड़ स्वीकृति हुआ था। जिससे आधा बना कर छोड़ दिया गया ओर बाकि समाज को बिना पुछे कही ओर सी.सी. रोड बना दिया गया
15. गोटूल भवन की कार्य पूर्व हो गया है, लेकिन अभी तक अंतिम शेष राशि भुगतान नहीं किया गया है।
16. इसके अतिरिक्त और भी शासकीय भूमि पर कब्जा हैं।
आंदोलन की चेतावनी
समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रशासन को ‘एकतरफा’ कार्रवाई बंद करनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि यदि कांशीराम दर्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो सूची में शामिल अन्य सभी 16 अतिक्रमणकारियों को भी तत्काल हटाया जाए।
”प्रशासन केवल एक व्यक्ति को बदनाम करने के उद्देश्य से शिकायत पर ध्यान दे रहा है। यदि सभी अवैध कब्जों पर समान रूप से बुलडोजर नहीं चला या जांच नहीं हुई, तो गोंडवाना समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।”
— गोंडवाना समाज समन्वय समिति, ग्राम बोगर
तहसीलदार सुरेंद्र उर्वसा ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए उचित जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी और ग्रामीण उपस्थित थे।
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