दुर्गुकोंदल: रात के अंधेरे में रेत का ‘काला खेल’, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

भानुप्रतापपुर। जिले के दुर्गुकोंदल ब्लॉक में रेत का अवैध उत्खनन थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र की नदियों से रात के अंधेरे में धड़ल्ले से रेत निकाली जा रही है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की चुप्पी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि यह मुद्दा अब सड़क से लेकर विधानसभा की दहलीज तक जा पहुँचा है, बावजूद इसके धरातल पर ठोस कार्रवाई शून्य है।
नियमों को ताक पर रखकर उत्खनन
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि मायनिंग के कड़े नियमों को ताक पर रखकर रेत खदानों का संचालन किया जा रहा है। रात होते ही नदियों में मशीनों का शोर गूंजने लगता है और सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत खपा दी जाती है। खनिज और राजस्व विभाग की टीम कभी-कभार “खानापूर्ति” के लिए निरीक्षण तो करती है, लेकिन बड़े सिंडिकेट पर हाथ डालने से कतरा रही है।
विधानसभा में गूँजा मामला, फिर भी विभाग सुस्त
दुर्गुकोंदल ब्लॉक में चल रहे इस अवैध कारोबार की गूँज हाल ही में विधानसभा में भी सुनाई दी। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगाए। इसके बावजूद, मैदानी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग केवल छोटी कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा रहा है, जबकि मुख्य सरगना अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।
- सियासी घमासान: कांग्रेस-भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप
- रेत के इस खेल ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
- भाजपा का कहना है कि यह सब पिछले भ्रष्टाचार की देन है और प्रशासन कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
- कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता संरक्षण में रेत माफिया बेलगाम हो चुके हैं और नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है।
दोनों ही दल एक-दूसरे पर
दोषारोपण कर रहे हैं, लेकिन इस बीच क्षेत्र की पारिस्थितिकी और राजस्व को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
“अवैध रेत खनन से न केवल भूजल स्तर गिर रहा है, बल्कि शासन को मिलने वाली रॉयल्टी का भी करोड़ों का नुकसान हो रहा है। अगर जल्द ही बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।” — स्थानीय ग्रामीण
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