पिच्चेकट्टा जलाशय और मावली पहाड़ी को पर्यटन स्थल बनाने की उठी मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

भानुप्रतापपुर। जिले की प्राकृतिक सुंदरता को विश्व पटल पर लाने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के प्रसिद्ध पिच्चेकट्टा जलाशय और मावली पहाड़ी को आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए स्थानीय आदिवासी समुदाय और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
विकास और रोजगार की नई राह
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आदिवासी नेताओं का मानना है कि इन स्थलों में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि शासन द्वारा यहाँ बुनियादी ढांचा विकसित किया जाता है, तो न केवल जिले की प्राकृतिक पहचान बढ़ेगी, बल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में आर्थिक उन्नति के नए द्वार भी खुलेंगे।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें:
- पहुंच मार्ग (सड़कों) का निर्माण और सुधार।
- पर्यटकों के बैठने के लिए व्यू पॉइंट और बोर्डिंग की सुविधा।
- व्यवस्थित पार्किंग और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम।
- पर्यटन स्थल के प्रचार-प्रसार हेतु सूचना बोर्ड और अन्य सुविधाएं।

प्रतिनिधिमंडल की सक्रियता
इस मांग को लेकर जनपद सदस्य विष्णु कचलाम, सरपंच तुमन मण्डावी, और प्रमुख आदिवासी नेता कोमल हुपेण्डी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से मुलाकात की। इस दौरान अशोक सोनवानी, रामकुमार गावड़े, धिरसाय कोरेटी और महेंद्र दर्रो सहित अन्य स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।
“इन प्राकृतिक स्थलों का विकास स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। यह पहल हमारे क्षेत्र की पहचान बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।” — प्रतिनिधिमंडल के सदस्य
प्रशासन का आश्वासन
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक रुख अपनाया। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि इन स्थलों के सर्वे और विकास के लिए आवश्यक तकनीकी कदम उठाए जाएंगे और शासन स्तर पर हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
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