भानुप्रतापपुर: वन विभाग की भूमि पर ‘पट्टा’ आवंटन में बड़ा खेल, पटवारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

भानुप्रतापपुर। भानुप्रतापपुर क्षेत्र में वन विभाग की बेशकीमती भूमि पर फर्जी तरीके से वन अधिकार पत्र पट्टा जारी करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि राजस्व पटवारी ने नियमों को ताक पर रखकर और आर्थिक लाभ लेकर अपात्र व्यक्तियों के नाम पर नक्शा-खसरा जारी कर दिया, जिसके आधार पर उनके पट्टे भी बन गए हैं।

वन भूमि पर राजस्व विभाग की ‘सेंधमारी’
शिकायत के अनुसार, पूरा मामला वन भूमि कक्ष क्रमांक PF 827 का है। नियमानुसार यह भूमि पूर्णतः वन विभाग के अधीन है और इस पर किसी भी प्रकार के राजस्व हस्तक्षेप की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके, पूर्व में पदस्थ रहे राजस्व पटवारी विशेष तिरसुनिया द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया गया।
2005 की शर्त का उल्लंघन और फर्जीवाड़ा
शिकायतकर्ता यशवंत चक्रधारी ने दस्तावेजों के साथ उच्च अधिकारियों से शिकायत की है। आरोप है कि ‘वन अधिकार अधिनियम 2006’ के प्रावधानों के अनुसार, केवल उन्हीं व्यक्तियों को पट्टा मिल सकता है जो 2005 से पूर्व से उस भूमि पर काबिज हों। लेकिन पटवारी विशेष तिरसुनिया ने कथित तौर पर मोटी रकम लेकर उन लोगों को भी 2005 से पूर्व का निवासी बता दिया, जो वास्तव में उस समय वहां काबिज ही नहीं थे।

इन 8 लोगों को मिला ‘संदिग्ध’ लाभ
शिकायत पत्र में उन लाभार्थियों की सूची भी सौंपी गई है, जिनके पट्टों की जांच की मांग की गई है। उर्मिला सोरी,शिवबति दुग्गा, ओमबती, हेमंत सोनी, प्रेमलता दर्रो, दरबार सिंह, रामेश्वरी, हिमांशी मरकाम शामिल है। जिनका पटावरी द्वारा नक्सा खसरा जारी कर पट्टा बनने के लिए दस्तावेज तैयार किया गया है जिसके बाद इनका पट्टा बन गया।हैं। 

जिला दंडाधिकारी व मुख्य वन संरक्षक से उच्च स्तरीय जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने जिला दंडाधिकारी कांकेर, मुख्य वन संरक्षक सहायक आयुक्त और पूर्व वन मंडलाधिकारी भानुप्रतापपुर को लिखित शिकायत सौंपी है और पटवारी विशेष तिरसुनिया द्वारा जारी किए गए नक्शा-खसरा की उच्च स्तरीय जांच हो।नियमों के विरुद्ध जारी किए गए पट्टों को तत्काल निरस्त किया जाए। दोषी पटवारी और संलिप्त अन्य लोगों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्यवाही की जाए। वर्तमान में वन विभाग और प्रशासन के पास शिकायत पहुंच चुकी है। अब देखना यह होगा कि सरकारी जमीन और नियमों के साथ हुए इस खिलवाड़ पर प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है।
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