नियमों को ताक पर रखकर गोदावरी पावर का मनमाना विस्तार, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

भानुप्रतापपुर | मेसर्स गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड द्वारा भानुप्रतापपुर क्षेत्र में किए जा रहे कथित अवैध विस्तार ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। कंपनी पर पर्यावरण, सुरक्षा और खनन नियमों के खुले उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी है, जिसने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

5000 पेड़ों की बलि और ‘जुर्माने’ का खेल
आरोप है कि कंपनी ने विस्तार के नाम पर लगभग 5000 से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई की है। वन संरक्षण अधिनियम 1980 और EIA अधिसूचना 2006 के तहत बिना पूर्व अनुमति के एक पेड़ काटना भी अपराध है, लेकिन यहाँ हजारों पेड़ों को धराशायी कर दिया गया। चर्चा है कि विभागीय जांच में तथ्य सामने आने के बाद भी कोई कड़ी कार्रवाई करने के बजाय, केवल आर्थिक दंड लेकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई है, जो सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

अवैध सड़क निर्माण और अतिक्रमण
नियमों को दरकिनार करते हुए कंपनी ने लगभग 40 मीटर चौड़ी और 1 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के कर लिया है। भूमि उपयोग नियमों और खनन पट्टा शर्तों के अनुसार इसके लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य थी। इतना ही नहीं, स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी आवंटित पट्टे की सीमा से बाहर निकलकर धीरे-धीरे सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर रही है।

खतरे की घंटी: असुरक्षित रिटेनिंग वॉल
सुरक्षा के लिहाज से सबसे खतरनाक पहलू कंपनी द्वारा बनाई गई 90 डिग्री कोण की रिटेनिंग वॉल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दीवार खनन सुरक्षा नियम 2017 और BIS मानकों के विपरीत है। आरोप है कि इस दीवार की अनुमति गलत जानकारी देकर हासिल की गई है। यदि यह दीवार ढहती है, तो जान-माल की भारी तबाही मच सकती है।

शिवसेना ने खोला मोर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण को लेकर शिवसेना ने कड़ा रुख अपनाया है। चन्द्रमौली मिश्रा (शिवसेना) ने प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
स्वतंत्र ऑडिट: कटे हुए पेड़ों की संख्या और अनुमति की निष्पक्ष जांच हो।
सड़क सील हो: बिना अनुमति बनी अवैध सड़क को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए।
तकनीकी जांच: रिटेनिंग वॉल की सुरक्षा जांच विशेषज्ञों की टीम से कराई जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: नियमों को अनदेखा करने वाले अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन पर सख्त एफआईआर दर्ज हो।
“कंपनी अपने रसूख के दम पर पर्यावरण और सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ कर रही है। यदि प्रशासन जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो यह एक बड़ी जनहानि और पर्यावरणीय आपदा को निमंत्रण देना होगा।” — चन्द्रमौली मिश्रा, शिवसेना
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